डेयरी मैनेजमेंट में उच्च शिक्षा और करियर

विश्व के डेयरी उद्योग में भारत का अग्रणी स्थान है। मगर इसके बावजूद भारतीय डेयरी सेक्टर अभी विकास व आधुनिकीकरण की आरंभिक अवस्था में ही है।

हम विश्व में सबसे अधिक गोवंश संख्या पर तो गर्व करते हैं लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिकी गाय की तुलना में भारतीय गाय का औसत दूध उत्पादन काफी कम है। स्पष्ट है की डेयरी उद्योग में विकास की अभी व्यापक संभावनाएं हैं और इसके साथ ही इसमें करियर बनाने का स्कोप भी जबरदस्त है।

भारत में गायों की संख्या 14 करोड़ और भैंसों की संख्या 13 करोड़ है। यहाँ 1 करोड़ से अधिक डेरी फार्मर 1 लाख से अधिक स्थानीय सहकारी डेयरियों से जुड़े हैं। इस सेक्टर का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 1,20,000 करोड़ रूपये है।

एमबीइन डेयरी मैनेजमेंट

अनुमान है कि सन 2020 तक भारत विश्व की डेयरी उत्पाद की जरूरतों के 29 प्रतिशत की आपूर्ति करेगा। बेशक ग्रामीण भारत के कमजोर तबकों के आर्थिक विकास में डेयरी सेक्टर अहम भूमिका निभाने जा रहा है। डेयरी मेनेजर अपने स्तर पर इसमें बड़ा योगदान कर सकते हैं। डेयरी उद्योग में लगातार हो रहे परिवर्तनों को देखते हुए इस क्षेत्र में अच्छे मेनेजरों की जरुरत लगातार बढती ही जानी है।

साथ ही यह जरुरी है कि डेयरी मेनेजर नवीनतम टेक्नोलॉजी से वाकिफ रहें। डेयरी मैनेजमेंट में एमबीए करने से आप डेयरी सेक्टर में प्रभावशाली भूमिका निभा सकते हैं। यह कोर्स आपको डेयरी सेक्टर को सुचारू रूप से चलाने की स्किल प्रदान करता है।

एमबीए इन डेयरी मैनेजमेंट करके आप डेयरी फार्मिंग के बारे में विस्तृत ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। फिर इस ज्ञान और स्किल को जमीनी स्तर पर किसानों के बीच लागू करके आप देश के डेयरी सेक्टर में क्रांति ला सकते हैं। आम तौर पर एक डेयरी फार्म मेनेजर को यह सुनिश्चित करना होता है कि डेयरी फार्म में सही कार्य-प्रक्रिया का पालन किया जाये, जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि हो और पशुओं की उत्पादकता तथा स्वास्थ्य में भी सुधार हो।

कोर्स कंटेंट

एमबीए इन डेयरी मैनेजमेंट में कई विषयों को विस्तार से पढाया जाता है। इनमें प्रमुख हैं: मिल्किंग मैनेजमेंट (फीडिंग मैनेजमेंट, काफ मैनेजमेंट, मिल्क फिल्ट्रेशन), मेन्योर हैंडलिंग (हूफ मैनेजमेंट, डेयरी फार्म प्लानिंग मैनेजमेंट, बायोसिक्योरिटी), काऊ लोंजेविटी (डेयरी हर्ड मैनेजमेंट, डेयरी बफैलो प्रोडक्शन मैनेजमेंट, डेयरी प्लांट मेंटेनेंस), एनिमल हेल्थ एंड लाइवस्टॉक (क्वालिटी कंट्रोल इन डेयरी इंडस्ट्रीज, मार्केटिंग ऑफ़ डेयरी प्रोडक्ट्स, कैटल डेवलपमेंट इन इंडिया)।

एलिजिबिलिटी

एमबीए इन डेयरी मैनेजमेंट कोर्स  करने के लिए जरुरी है कि आपने न्यूनतम वांछित अंकों के साथ 12वीं पास की हो। इस कोर्स में प्रवेश कैट/मैट/जैट/स्नेप/सीमैट आदि जैसी एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर दिया जाता है। कुछ कालेजों में प्रवेश के लिए बीएससी या बीटेक की डिग्री होना जरुरी होता है। ध्यान रहे, डेयरी टेक्नोलॉजी तथा मैनेजमेंट अंडरग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट दोनों स्तरों पर पढाया जाता है। इसमें डेयरी विज्ञान के तकनीकी और मैनेजमेंट दोनों पहलुओं पर जोर दिया जाता है।

डेयरी टेक्नोलॉजी और डेयरी मैनेजमेंट में अंतर

डेयरी टेक्नोलॉजी का क्षेत्र जहाँ मुख्य रूप से दूध के उत्पादन और प्रोसेसिंग से सम्बद्ध है, वहीँ डेयरी मैनेजमेंट में इस उद्योग के प्रबंधन का कार्य देखा जाता है। डेयरी टेक्नोलॉजिस्ट डेयरी उत्पादों को तैयार करने की विभिन्न पद्धतियों व तकनीकों पर काम करते हैं। वहीँ डेयरी मेनेजर दूध की प्रोसेसिंग द्वारा विभिन्न उत्पादों के निर्माण, उनके विभिन्न बाजारों तक परिवहन, वितरण आदि की सारी व्यवस्था सँभालते हैं।

जॉब और व्यवसाय के अवसर

डेयरी मैनेजमेंट में एमबीए करने के बाद आप इस क्षेत्र में कुछ बेहद आकर्षक पदों पर जॉब पा सकते हैं। ये हैं – फार्म मेनेजर, डेयरी मेनेजर, आर एंड डी मेनेजर, असिस्टेंट क्वालिटी मेनेजर, बायोलॉजिकल साइंस, टेक्नीशियन, सेनेटेरियन, एग्रीकल्चर स्पेशलिस्ट, असिस्टेंट प्लांट मेनेजर, एग्रीकल्चरल यूनिट सुपरवाइजर, डेयरी न्यूट्रिशनिस्ट, डेयरी क्वालिटी मेनेजर, हेड फार्म सर्विसेज आदि। भारत ही नहीं, आप एमबीए इन डेयरी मैनेजमेंट करके विश्व के अन्य प्रमुख उत्पादक देशों में भी बेहतर करियर बना सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टिट्यूट, करनाल

http://www.ndri.res.in

कॉलेज ऑफ़ डेयरी साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, मन्नूथी

http://www.kvasu.ac.in

सेठ एमसी कॉलेज ऑफ़ डेयरी साइंसेज, आनंद एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, गुजरात

http://www.aau.in

डेयरी साइंस कॉलेज, बेंगलुरु

http://www.kvafsu.kar.nic.in

कॉलेज ऑफ़ डेयरी टेक्नोलॉजी, नागपुर

http://www.mafsu.in

जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर

http://www.jnkvv.nic.in

 

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