ग्लास डिजाइनिंग में उच्च शिक्षा और करियर

परम्परागत करियर ऑप्शन से अलग ऐसे कई फ़ील्ड्स हैं, जहाँ युवा अपनी स्रज्नात्मकता, कल्पनाशीलता और डिजाइनिंग स्किल्स के जरिये न सिर्फ एक अच्छा करियर बना सकते हैं, बल्कि सफलता भी हासिल कर सकते हैं। ऐसा ही एक करियर ऑप्शन है,ग्लास डिजाइनिंग’ का।

हाल-फिलहाल डिजाइनिंग की इस फील्ड में लोगों की रूचि तेजी से बढ़ी है। अगर आप भी एक क्रिएटिव करियर बनाना चाहते हैं, तो आपके लिए गिलास डिजाइनिंग बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है…।

Glass Designs

कहना गलत नहीं होगा की पिछले कुछ समय से लोगों के डिजाइनिंग सेंस में निखर आया है, जिसका असर नए मकानों और बिल्डिंग्स पर देखा जा सकता है। अब लोग अपने घर और ऑफिस में डिज़ाइनर ग्लास के इस्तेमाल को पसंद करते हैं शायद यही कारण है कि बाजार में अब अलग-अलग डिजाईन्स के ग्लास की भरमार है

लोगों की सोच में आये इस बदलाव ने रचनात्मक युवाओं के लिए करियर का नया दृार खोल दिया है। अगर आप भी परंपरागत करियर से अलग कुछ करना चाहते हैं, तो ग्लास डिजाइनिंग का कोर्स कर सकते हैं।

क्या है ग्लास डिजाइनिंग

रॉ (कच्चे) ग्लास को ग्लासवेयर, गिफ्ट वेयर , क्राफ्टेड ग्लास विंडोज, ओरनेट आइटम्स, ग्लास इंस्ट्रूमेंट आदि के रूप में मोल्ड करने की प्रक्रिया को ‘ग्लास डिजाइनिंग’ कहते हैं, और यह काम करने वाले प्रोफेशनल्स ग्लास डिज़ाइनर, गोफर, ब्लोअर कहलाते हैं। पहले ग्लास को ग्लास लेबोरेटरी और फैक्ट्री में मोल्ड किया जाता है और उसके बाद आर्टिस्ट्स के पास डिजाईन स्टूडियो में भेजा जाता है।

ग्लास डिजाइनिंग में कोर्स

इस फील्ड में करियर बनाने के लिए इंटर में गणित, भौतिकी और रसायन विषय होने चाहिए। इसके बाद आप सेरामिक एंड ग्लास डिजाइनिंग  में ‘बेचलर ऑफ़ डिजाईन’ और उसके बाद ‘मास्टर ऑफ़ डिजाईन’ का कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा आप सेरामिक एंड ग्लास टेक्नोलॉजी में ‘बीटेक’ या डिजाईन में ‘बेचलर ऑफ़ फाइन आर्ट्स’ का कोर्स भी कर सकते हैं। मास्टर्स के बाद आप इस फील्ड में पीएचडी भी कर सकते हैं।



वर्क प्रोफाइल

ग्लास डिजाइनिंग कोर्स में विद्यार्थियों को ग्लास मौल्डिंग टेक्नोलॉजी के पीछे के विज्ञान के बारे में पढाया जाता है ताकि वे मोल्डेड ग्लास को डिज़ाइन करने की टेक्निक्स सीख सकें। आम तौर पर ग्लास डिज़ाइनर्स डिज़ाइन स्टूडियो में काम करते हैं। ग्लास की लम्बाई के हिसाब से वे कंप्यूटर पर डिजाईन थीम तैयार करते हैं और फिर मशीनों की मदद से ग्लास पर डिजाईन्स बनाई जाती हैं। इस तरह अलग-अलग उद्देश्यों के लिए क्लियर, फ्रॉस्टेड, लिनेन, मिल्की स्मोक्ड, लैमिनेटेड और कॉम्बिनेशन ग्लासेज को तैयार किया जाता है।

जरुरी स्किल

इस फील्ड में करियर बनाने के लिए प्रयासरत युवाओं के पास ‌‌‍सृजनात्मकता, imaginative स्किल्स और डिजाइनिंग टैलेंट होना चाहिए। उनमें अलग-अलग थीम्स पर डिजाईन तैयार करने की क्षमता होनी चाहिए। इसके अलावा नवीनतम टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी होने के साथ-साथ उसमें टीम भावना और बेहतरीन कम्युनिकेशन स्किल्स का होना भी जरुरी है।

सैलरी और पैकेज

इस फील्ड में करियर टेक्नोलॉजी बेकग्राउंड वाले फ्रेशर्स की सैलरी २५,००० रूपये से शुरू होती है। जबकि अनुभवी उम्मीदवारों का वार्षिक पैकेज ५-८ लाख रूपये तक होता है।

आप अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे डिजाईन स्टूडियो के साथ कर सकते हैं। ये स्टूडियोज बेहतर संभावनाओं वाले प्रतिभाशाली युवाओं को हायर करते हैं। इस फील्ड में डिज़ाइनर्स की काफी कमी है, लिहाजा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही कम्पनियाँ नये व् स्किल्ड डिज़ाइनर्स को हायर कर लेती हैं। जॉब करने के आलावा आप अपना एंटरप्रेनेओल वेंचर भी खोल सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिजाईन, अहमदाबाद, गांधीनगर, बेंगलुरु

www.nid.edu

  • आईआईटी बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी

www.iitbhu.ac.in

  • विश्वभारती विश्वविद्यालय, शान्तिनिकेतन

www.viswabharti.ac.in

  • इंडस्ट्रियल डिजाईन सेंटर, आईआईटी, मुंबई

www.idc.iitb.ac.in

  • एमआईटी इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिजाईन, पुणे

www.mitid.edu.in

  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, डिजाईन एंड मैन्युफैक्चरिंग, जबलपुर

www.iiitdmj.ac.in

  • एपीजे इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिजाईन, दिल्ली

www.apeejay.edu