10वीं और 12 वीं के बाद किये जाने वाले जॉब ओरिएंटेड कोर्सेज

यूँ तो पढाई जितनी की जाए, कम ही होती है। ज्ञान प्राप्त करने की कोई सीमा नहीं होती और ऊंची डिग्री के बाद बेहतर करियर बनाने की संभावना निश्चित ही बढती है। मगर कई युवा किसी कारणवश दसवीं और बारहवीं के बाद पढाई जारी नहीं रख पाते।

ऐसे युवा भी दसवीं और बारहवीं के दम पर कई फ़ील्ड्स में अपना भविष्य बना सकते हैं। कौन-कौन से ऐसे कोर्सेज और फ़ील्ड्स हैं, आइये उन पर एक नज़र डालते हैं।

हार्डवेयर नेटवर्किंग

नई तकनीकों की वजह से कंप्यूटर, लैपटॉप और उनकी नेटवर्किंग का महत्व आजकल बहुत बढ़ गया है। ऐसे में अगर आप आईटी सेक्टर में इंजिनियर बनना चाहते हैं, तो हार्डवेयर नेटवर्किंग एक अच्छा विकल्प है। यह शार्ट टर्म कोर्स करने के बाद आप तुरंत जॉब पा सकते हैं। हार्डवेयर इंजिनियर बनने के लिए मुख्य रूप से दो बेसिक कोर्स करने पड़ते हैं – हार्डवेयर का कोर्स और बेसिक नेटवर्किंग का कोर्स। ये दोनों कोर्स आप 12वीं के बाद कर सकते हैं। कई सरकारी और प्राइवेट संस्थान नेटवर्किंग से जुड़े कोर्स ऑफर कर रहे हैं।



चिप लेवल इंजीनियरिंग

यह हार्डवेयर नेटवर्किंग का ही एक एडवांस कोर्स है, जिसमें युवाओं को कंप्यूटर, लैपटॉप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के चिप की रिपेयरिंग के बारे में जानकारी दी जाती है। इसमें कार्ड लेवल कोर्स के तहत युवाओं को मदरबोर्ड, सीडी ड्राइव या राऊटर आदि के ख़राब होने पर उन्हें बदलने के बारे में सिखाया जाता है। चिप यानी ‘इंटीग्रेटेड सर्किट’ कोर्स के अंतर्गत कंप्यूटर, लैपटॉप, टीवी, मोबाइल, रिमोट कंट्रोल, आदि की चिप की मरम्मत की जानकारी दी जाती है। चिप लेवल इंजीनियरिंग कोर्स तमाम संस्थानों में संचालित हो रहे हैं।

12वीं के बाद किसी भी स्ट्रीम के युवा यह कोर्स कर सकते हैं। यह कोर्स 6 से 8 माह का होता है। इसे करने के बाद युवा एचपी, आईबीएम, विप्रो जैसी कंपनियों तक में टेक्नीशियन के रूप में जॉब पा सकते हैं, जहाँ उपकरणों की रिपेयरिंग का काम होता है। मेनुफेक्चरिंग यूनिट्स में असेम्बलिंग, चेकिंग या क्वालिटी कंट्रोल विंग में सुपरवाइजर या क्वालिटी कंट्रोल इंजीनियर की जॉब भी मिल सकता है।

पैरामेडिकल

भारत में हेल्थकेयर तेजी से उभरता हुआ सेक्टर है। स्टूडेंट्स 10वीं के बाद डायलिसिस टेक्नीशियन, लैब टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन, ओप्थेल्मिक टेक्नोलॉजी में तीन साल का डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा नर्सिंग एंड ट्रेनिंग, मेडिकल रिकॉर्ड मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट कोर्स भी किया जा सकता है। कोर्स कम्पलीट करने के बाद प्राइवेट या सरकारी हॉस्पिटल व नर्सिंग होम में जॉब मिल जाती है।

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा

भारत में टेक्निकल एजुकेशन प्रदान करने वाले पॉलिटेक्निक्स ‘ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन’ (एआईसीटीई) से मान्यता प्राप्त होते हैं। अगर कोई स्टूडेंट टेक्निकल फील्ड में करियर बनाना चाहता है, तो वह दसवीं के बाद किसी पॉलिटेक्निक से इंजीनियरिंग में तीन साल का डिप्लोमा कोर्स कर सकता है।

मैकेनिकल, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्युनिकेशन, सिविल, ऑटोमोबाइल ब्रांच में इंजीनियरिंग के अलावा सिस्टम मैनेजमेंट, फैशन टेक्नोलॉजी, इंटीरियर डेकोरेशन जैसे आज के हॉट कोर्सेज में भी डिप्लोमा किया जा सकता है।

पॉलिटेक्निक में दाखिले के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में स्टेट लेवल पर एंट्रेंस एग्जाम होता है। इसे क्वालीफाई करने वाले स्टूडेंट्स को काउंसलिंग के बाद उनकी मेरिट के मुताबिक एडमिशन दिया जाता है। एंट्रेंस एग्जाम में 10वीं लेवल की मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री के साथ जीके, रीजनिंग, से जुड़े कॉमन क्वेश्चन पूछे जाते हैं।

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा के आधार पर सरकारी और निजी क्षेत्र के संस्थानों में जूनियर इंजिनियर (जेई) के रूप में नौकरी की शुरुआत की जा सकती है।

आईटीआई

अगर आपकी रूचि मशीनों या कोई स्पेशल क्राफ्ट सीखने में है, तो दसवीं के बाद आपके पास इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट यानी आईटीआई से कई तरह के शार्ट टर्म कोर्स करने के ऑप्शन्स हैं। भारत सरकार के श्रम मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त ये आईटीआई अपने यहाँ इंजीनियरिंग और नॉन इंजीनियरिंग फील्ड से रिलेटेड तमाम तरह के स्किल बेस्ड कोर्स संचालित करते हैं, जैसे ऑटोमोबाइल, डीजल मैकेनिक, इलेक्ट्रीशियन, मोटर ड्राईवर कम मैकेनिक, वेल्डर, फिटर आदि। ये कोर्सेज एक से तीन साल के होते हैं, जिनमें मेरिट के आधार पर दाखिला मिलता है। कोर्स कम्पलीट करने पर प्राइवेट सेक्टर के कारखानों, रेलवे, टेलिकॉम डिपार्टमेंट आदि में जॉब मिल सकती है। चाहें तो खुद का काम भी कर सकते हैं।



आईटी

आज कंप्यूटर की उपयोगिता बढ़ने से इसकी मेंटेनेंस करने वाले कुशल लोगों की डिमांड भी बढ़ी है। अगर कंप्यूटर में दिलचस्पी है, तो आप एडवांस्ड हार्डवेयर नेटवर्किंग या सॉफ्टवेयर से जुड़ा कोर्स कर सकते हैं।

10वीं के बाद स्टूडेंट्स ‘कंप्यूटर कांसेप्ट कोर्स’ (सीसीसी) भी कर सकते हैं। इसमें कंप्यूटर की बेसिक जानकारी, इन्टरनेट का उपयोग, कंप्यूटर पर अकाउंट की जांच करना आदि सिखाया जाता है। यह कोर्स भारत सरकार के मान्यता प्राप्त संस्थान डीओईएसीसी और इसकी ब्रांच से कर सकते हैं। कई प्राइवेट इंस्टिट्यूट भी ऐसे कोर्स कराते हैं। स्टूडेंट्स तीन महीने का ‘सर्टिफिकेट इन एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर’, 6 महीने का ‘कंप्यूटर एप्लीकेशन कोर्स’ और 12 महीने का ‘डिप्लोमा इन कंप्यूटर प्रोग्रामिंग एंड एप्लीकेशन’ कोर्स भी कर सकते हैं।

हेयर डिजाइनिंग

नई-नई हेयर स्टाइल का क्रेज जिस तरह से लोगों में बढ़ता जा रहा है, उससे हेयर स्टाइलिस्ट, हेयर डिज़ाइनर की डिमांड बढ़ गयी है। जिन्हें इस फील्ड में रूचि है, वे 10वीं के बाद ‘डिप्लोमा इन हेयर डिजाइनिंग’ कोर्स कर इस फील्ड में एंट्री ले सकते हैं। हेयर डिजाइनिंग में डिप्लोमा कोर्स मात्र 4 महीने का है। इसके बाद आपको सैलून, स्पा, होटल्स, कास्मेटिक यूनिट्स आदि में काम मिल सकता है। चाहें तो खुद का सैलून भी स्टार्ट कर सकते हैं। इसके अलावा, पेडीक्योर, मैनीक्योर और कोस्मेटोलोजी से रिलेटेड कोर्सेज भी हैं, जिन्हें किया जा सकता है।

एथिकल हैकिंग

चोरी छुपे कंप्यूटर, ईमेल, फेसबुक, वेबसाइट, सर्वर में सेंधमारी रोकने और चोरी हुए डाटा की रिकवरी के लिए बड़ी कंपनियों में एथिकल हैकिंग के जानकारों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे प्रोफेशनल सिक्यूरिटी इंजीनियर के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं। किसी भी स्ट्रीम के 12वीं पास विद्यार्थी यह कोर्स कर सकते हैं। कोर्स 3 से 6 माह की अवधि का होता है।

ग्राफ़िक डिजाइनिंग

यदि आप क्रिएटिविटी की दुनिया में कुछ नया करना चाहते हैं, तो ग्राफ़िक डिजाइनिंग बेहतरीन करियर साबित हो सकता है। दरअसल ग्राफ़िक डिजाइनिंग का मतलब किसी मैटर को विजुअल इफ़ेक्ट देना है, जिससे वह दिखने में आकर्षक लगे। ग्राफ़िक डिज़ाइनर्स के लिए वेबसाइट डिजाइनिंग, एडवरटाइजिंग एजेंसी, पब्लिकेशन्स, मीडिया, कंप्यूटर गेम्स तथा प्रोडक्ट पैकेजिंग से जुड़े संस्थानों में सबसे अधिक जॉब्स के अवसर हैं। 12वीं के बाद आप इस विषय में 1 साल से 3 साल तक की अवधि के कोर्स कर सकते हैं।

कंप्यूटर एकाउंटेंसी

आजकल कंप्यूटर एकाउंटेंसी का खूब इस्तेमाल होने लगा है। जीएसटी लागू होने के बाद इस क्षेत्र में आने वाले दिनों में नौकरी के अवसर और अधिक बढ़ेंगे। कंप्यूटर एकाउंटेंसी का कोर्स किसी भी स्ट्रीम के युवा 12वीं के बाद कर सकते हैं। यह 6 से 9 माह की अवधि का कोर्स है।

एनीमेशन

एनिमेटेड फिल्मों तथा विज्ञापनों का कारोबार भारत सहित पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है। देश में टीवी, फिल्मों का दायरा बढ़ने से इसमें एनीमेशन तकनीक के जानकारों के लिए नौकरी के काफी अवसर बढे हैं। ऐसे में यदि आपकी पृष्ठभूमि ड्राइंग और फाइन आर्ट्स की है, तो एनीमेशन इंडस्ट्री में आप बेहतर करियर बना सकते हैं। आप 12वीं के बाद एनीमेशन कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। किसी भी अच्छे एनीमेशन ट्रेनिंग संस्थान से अपनी जरुरत के अनुसार लॉन्ग या शार्ट टर्म कोर्स करके आप इसमें अपनी प्रतिभा निखार सकते हैं।

रेलवे

10वीं पास स्टूडेंट्स के लिए रेलवे में काफी ऑप्शन्स हैं। कमर्शियल क्लर्क और ट्रेन क्लर्क जैसे पोस्ट्स के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड आरआरबी लिखित परीक्षा के साथ-साथ दो चरणों में मेडिकल टेस्ट लेता है। अकाउंट क्लर्क-कम-टाइपिस्ट और जूनियर क्लर्क-कम-टाइपिस्ट के लिए लिखित परीक्षा और टाइपिंग टेस्ट लिया जाता है।

आरपीएफ कांस्टेबल के लिए फिजिकल एग्जाम और लिखित परीक्षा होती है। अगर आप टीसी (टिकट चेकर) बनना चाहते हैं, तो 50 प्रतिशत मार्क्स के साथ 10वीं पास होना जरुरी है। लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर इस पोस्ट पर सिलेक्शन होता है। इसके अतिरिक्त रेलवे में ग्रुप डी के पदों, जैसे गैंग मेन या ट्रैक मैन, हेल्पर या खलासी, प्लेटफार्म पोर्टर जैसे अन्य पदों के लिए भी 10वीं पास स्टूडेंट्स आवेदन कर सकते हैं। विस्तृत जानकारी के लिए वेबसाइट www.railwayrecruitment.co.in देख सकते हैं।

फैशन डिजाइनिंग

फैशन डिजाइनिंग का क्षेत्र काफी विस्तृत है। यहाँ गारमेंट डिजाइनिंग, फुटवियर मेनुफेक्चरिंग और डिजाइनिंग आदि में करियर बनाने की अपार गुंजाईश है। आप 12वीं के बाद फैशन से सम्बंधित किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं। फैशन डिजाइनिंग से सम्बंधित संस्थानों में ये कोर्स 6 माह से लेकर एक वर्ष की अवधि के होते हैं। कुछ संस्थानों में 3 साल का डिग्री कोर्स भी संचालित हो रहा है।

कोर्स पूरा करने के बाद आपको गारमेंट कंपनियों, फैशन ब्रांड्स, टेक्सटाइल मीलों व फैशन संस्थानों में रोजगार मिल सकता है। स्वरोजगार के तौर पर रेडीमेड गारमेंट बुटीक खोलकर भी कमाई की जा सकती है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी, नेशनल वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट फॉर वीमेन के अलावा पॉलिटेक्निक संस्थानों में भी यह कोर्स कराया जा सकता है।

आर्मी

10वीं पास स्टूडेंट्स भारतीय जल सेना की नॉन-टेक्निकल शाखाओं जैसे इन्फेंट्री आर्म्ड कोर और आर्टिलरी में आवेदन कर सकते हैं। थल सेना में सैनिक (सामान्य कार्य) के लिए कम से कम मेट्रिक 50 प्रतिशत अंको से उत्तीर्ण होना जरुरी है। आयु सीमा 16 से 21 के बीच होनी चाहिए। सैनिक ट्रेडमेन सामान्य कार्य और निर्दिष्ट कार्य के लिए मेट्रिक तथा भाषा का ज्ञान होना चाहिए।

अन्य कोर्सेज

10वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स को स्किल बेस्ड कोर्स पर फोकस करना चाहिए। पॉलिटेक्निक और आईटीआई के अतिरिक्त ‘नेशनल स्किल डेवलपमेंट कारपोरेशन’ भी स्किल बेस्ड कोर्सेज कराता है। अन्य सरकारी संस्थान जैसे ‘एनएसडीसी’, ‘एनवीटीआई’ और ‘ऑफिस ऑफ़ कमिश्नर ऑफ़ इंडस्ट्रीज’ भी हैं, जो इलेक्ट्रीशियन, टीवी रिपेयरिंग, कारपेट वीविंग, इंश्योरेंस और मेडिकल फील्ड में जॉब ओरिएंटेड कोर्सेज कराते हैं। कम्युनिकेशन और इन्टरनेट ब्राउज़िंग स्किल्स डेवलप करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साथ ही, फ्यूचर में भी आप अपने स्किल्स को मेन्टेन रखें, भले ही आपने जॉब पा ली हो।