खेलों और उनसे सम्बद्ध प्रोफेशन्स में उज्जवल भविष्य

खेल अभिरुचि के साथ-साथ एक करियर भी है। इस समय खेलों की दुनिया में करियर के बहुत चमकीले अवसर देश और दुनिया में उपलब्ध हैं। सीधे शब्दों में कहें तो खेलों में रूचि रखने वाले बच्चों के लिए स्पोर्ट्स आज एक बेहतरीन करियर विकल्प बनकर उभर रहा है।

कुछ समय पहले तक माता-पिता अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजिनियर, पायलट, आईएएस, आईपीएस आदि ही बनाना चाहते थे परन्तु आज वे उन्हें सचिन तेंदुलकर, साइना नेहवाल, पीवी सिन्धू, मैरीकॉम, महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली, विश्वनाथन आनंद आदि की तरह बनाने का सपना देखते हैं।

कुछ समय पहले तक खेलना और खेल में करियर बनाना दो अलग बातें हुआ करती थीं। उस समय राज्य स्तर की टीम या राष्ट्रीय टीम में शामिल होना तो बहुत कठिन बात होती थी, अगर टीम में स्थान मिल भी जाये तो खेलकर होने वाली आमदनी से गुजारा करना उससे भी ज्यादा कठिन होता था। खेल से रिटायर होने के बाद रोजगार के लिए कोई विकल्प नहीं हुआ करते थे। आज भारत ही नहीं, समूचे विश्व में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा खेलों का प्रायोजन करने से वैश्विक स्तर पर खेलों को काफी बढ़ावा मिल रहा है।

जरुरी स्किल्स

यदि आप खेलों में अपना उज्जवल करियर बनाना चाहते हैं, तो खेलों के प्रति आपका रुझान होना बेहद जरुरी है। इस प्रोफेशन के लिए आपके शरीर का पूरी तरह फिट होना बेहद जरुरी है। शारीरिक व मानसिक स्टार पर स्टैमिना मजबूत होना चाहिए। प्रतिस्पर्धा क्षमता व नेतृत्व करना का माद्दा भी इस क्षेत्र में उन्नति के लिए नितांत आवश्यक है। विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करने के लिए खिलाडियों को हमेशा आत्मविश्वास, आत्मानुशासन, दृढ इच्क्षाशक्ति, धैर्य, एकाग्रता और कभी हार न मानने जैसे गुणों से युक्त होना चाहिए।

खेलों से जुड़े प्रोफेशनल्स और प्रोफेशन

खेलों के बढ़ते महत्व को देखते हुए खेल गतिविधियों को संचालित करने के लिए पब्लिक रिलेशन, मीडिया, हेल्थ व फिटनेस, इवेंट मैनेजमेंट, जर्नलिज्म, सेल्स, मार्केटिंग, लीगल, फाइनेंस, फिटनेस एंड मेडिकल, फाइनेंस आदि क्षेत्रों से जुड़े प्रशिक्षित लोगों की मांग में भी बहुत इजाफा हुआ है। केवल खिलाडियों के लिए ही नहीं अपितु अन्य पेशेवरों के लिए भी खेल की दुनिया में रोजगार के असीमित अवसर हैं। इनमें स्पोर्ट्स फ़िज़ियोथेरेपिस्ट, कोच, टीम मेनेजर, फिजिकल ट्रेनर, फिटनेस ट्रेनर, रैफरी व अंपायर, न्यूट्रीशनिस्ट, साइकोलोजिस्ट, इवेंट आर्गेनाइजर, सेल्स मेनेजर, मार्केटिंग डायरेक्टर और कमेंटेटर जैसे विकल्प प्रमुख हैं।

खेल के रीजनल सेंटर

विभिन्न खेलों में प्रोफेशनल्स खिलाडियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कोचिंग देने लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) ने देश में 6 रीजनल सेंटर खोले हैं। साई देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में फिजिकल एजुकेशन व स्पोर्ट्स साइंस सम्बन्धी कई सर्टिफिकेट, डिप्लोमा तथा डिग्री स्तर के कोर्स भी संचालित करता है। ये हैं – साई नेशनल स्पोर्ट्स वेस्ट सेंटर, गांधीनगर, साई नेशनल स्पोर्ट्स ईस्ट सेंटर, कोलकाता, साई नेशनल स्पोर्ट्स साउथ सेंटर, बंगलुरु, साई नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्पोर्ट्स, पटियाला, इंदिरा गाँधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स नई दिल्ली, यूनिवर्सिटी ऑफ़ कोलकाता, कोलकाता।

कहाँ से करें कोर्स

देश भर के विभिन्न संस्थानों में खेलों के प्रशिक्षण के अलावा फिजिकल एजुकेशन में बैचलर, मास्टर कोर्स तथा खेलों से जुड़े कोर्सेज के लिए इन संस्थानों से संपर्क किया जा सकता है।

लक्ष्मी बाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन, ग्वालियर : यहाँ बीपीएड, एमपीएड, एक वर्षीय एमफिल के अलावा खेल में पीएचडी भी उपलब्ध है। बीपीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु शैक्षणिक योग्यता 12वीं निर्धारित है।

पुणे विश्वविद्यालय, पुणे : यहाँ से स्पोर्ट्स पत्रकारितामेडिसिन आयुर्वेद में पीजी डिप्लोमा किया जा सकता है। इसमें प्रवेश की योग्यता स्वरूप पत्रकारिता के लिए बीपीएड और स्पोर्ट्स मेडिसिन के लिए मेडिकल डिग्री होना जरुरी है।

एसएनडीटी विमेंस यूनिवर्सिटी, मुंबई : यहाँ युवतियों हेतु खेल के विशिष्ट पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। यहाँ से स्पोर्ट्स साइंस व न्यूट्रिशन में पीजी डिप्लोमा किया जा सकता है। इसके लिए विज्ञान विषय में ग्रेजुएशन जरुरी है।

गुरु नानकदेव यूनिवर्सिटी, अमृतसर : स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी में स्नाकोत्तर, डिग्री पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इसमें प्रवेश के लिए बैचलर ऑफ़ फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम आवश्यक है।

कुछ अन्य संस्थान

तमिलनाडु फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, चेन्नई

देवी अहिल्या विश्विद्यालय, इंदौर

बरकतुल्ला विश्विद्यालय, भोपाल

अव्धेशप्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा

पंडित रवि शंकर विश्वविद्यालय, रायपुर

डॉ बाबा साहेब अंबेडकर मराठवाडा यूनिवर्सिटी, औरंगाबाद

मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई

वाटर साइंस और मैनेजमेंट में करियर

आज नदियों की सफाई, वर्षा जल का भंडारण, मकानों के निर्माण के साथ ही वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली की स्थापना, नदियों की बाढ़ से आने वाले पानी को सूखाग्रस्त इलाकों के लिए संग्रहित करना, सीवेज जल का प्रबंधन कर खेती आदि के कार्यकलापों में इस्तेमाल आदि पर आधारित योजनाओं का क्रियान्वन सभी देशों में किया जा रहा है।

विकास के बढ़ते क़दमों के बीच पानी को बचाना अहम् हो गया है। नदियों, भूजल से लेकर बरसात के पानी को सहेजना-संभालना न सिर्फ मनुष्य का दायित्व है, बल्कि अब यह करियर ऑप्शन के रूप में भी उभरकर आया है। अन्य देशों की तरह ही अब हमारे यहाँ भी जल प्रबंधन और संरक्षण पर केन्द्रित पर केन्द्रित कोर्स करके पर्यावरण की रक्षा करने का यह करियर अपनाया जा सकता है।

एम एस बडौदा विश्वविद्यालय

www.msubaroda.ac.in

जल प्रबंधन और संरक्षण पर आधारित कोर्सेज अब औपचारिक तौर पर तमाम देशों में अस्तित्व में आ गए हैं। पहले परंपरागत विधियों एवं प्रणालियों से जल की बर्बादी रोकने तक ही समस्त उपाय सीमित थे। आज देश में स्कूल स्तर से लेकर यूनिवर्सिटी में एमई और एमटेक तक के कोर्सेज चलाये जा रहे हैं।

वाटर साइंस, वाटर कंजर्वेशन, वाटर मैनेजमेंट, वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर ट्रीटमेंट, वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट जैसी कई स्ट्रीम्स हैं जिन्हें चुनकर आप इस फील्ड में करियर बना सकते हैं।

आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम

www.andhrauniversity.info

वाटर साइंस

हवा और जमीन पर उपलब्ध पानी और उससे जुड़े प्रोसेस का विज्ञान वाटर साइंस कहलाता है। इससे जुड़े प्रोफेशनल वाटर साइंटिस्ट कहलाते हैं।

आईआईटी, रुड़की

www.iitr.ac.in

स्कोप

केमिकल वाटर साइंस : पानी के रासायनिक गुणों का अध्ययन।

इकोलॉजी : जीव-जंतुओं व् वाटर-साइंस साइकिल के बीच इंटरकनेक्टेड प्रोसेस की स्टडी।

हाइड्रो-जिओलोजी : भूजल के डिस्ट्रीब्यूशन तथा मूवमेंट की स्टडी।

हाइड्रो-इन्फार्मेटिक्स : वाटर साइंस और वाटर रिसोर्सेज के एप्लीकेशन्स में आईटी के इस्तेमाल की स्टडी।

हाइड्रो-मीटीयोरोलॉजी : जल और ऊर्जा ट्रान्सफर की स्टडी। पानी के आइसोटोपिक सिग्नेचर की स्टडी।

सरफेस वाटर साइंस : पानी की ऊपरी सतह के पास होने वाली हलचलों की स्टडी।

अन्ना यूनिवर्सिटी

www.annauniv.edu

वाटर साइंटिस्ट की जिम्मेदारियां और काम

▪ हाइड्रोमीट्रिक और वाटर क्वालिटी का मेज़रमेंट

▪ नदियों, झीलों और भूमिगत जल के स्तर, नदियों के प्रवाह, वर्षा और जलवायु परिवर्तन को दर्ज दर्ज करने वाले नेटवर्क का रख-रखाव

▪ पानी के नमूने लेना और उनकी केमिकल एनालिसिस करना

▪ बर्फ तथा ग्लेशियरियों का अध्ययन का अध्ययन

▪ वाटर क्वालिटी सहित नदी में जल प्रवाह की मॉडलिंग

▪ मिट्टी और पानी के प्रभाव के साथ-साथ सभी स्तरों पर पानी की जांच करना

▪ जोखिम की स्टडी सहित सूखे और बाढ़ की स्टडी

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली

www.ignou.ac.in

किससे जुड़कर काम करते हैं?

सरकार : पर्यावरण से सम्बंधित नीतियों को तैयार करना, एग्जीक्यूट और मैनेज करना।

अंतर्राष्ट्रीय संगठन : टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और आपदा राहत।

एडवाइजरी : सिविल इंजीनियरिंग, पर्यावरणीय प्रबंधन और मूल्यांकन में सेवाएं उपलब्ध कराना।

अकेडमिक्स एंड रिसर्च : नई एनालिटिकल टेक्निक्स के जरिये टीचिंग एंड रिसर्च वर्क करना।

यूटिलिटी कंपनियां और पब्लिक अथॉरिटीज : वाटर सप्लाई और सीवरेज की सर्विस देना।

जरुरी योग्यता

वाटर साइंस से सम्बंधित सब्जेक्ट में बेचलर्स डिग्री, मास्टर्स डिग्री को वरीयता। जियोलोजी, जियो-फिजिक्स, सिविल इंजीनियरिंग, फॉरेस्ट्री एंड एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग सब्जेक्ट्स इनमें शामिल हैं।

अन्नामलाई यूनिवर्सिटी

www.annamalaiuniversity.ac.in

वाटर मैनेजमेंट

बढ़ते शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारन आज पूरी दुनिया पानी की किल्लत से जूझ रही है। इसे देखते हुए वाटर मैनेजमेंट और कन्जेर्वेशन से जुड़े प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ रही है। आजकल हाउसिंग काम्प्लेक्सेज से लेकर उद्योगों आदि में ऐसे प्रोफेशनल्स की जरुरत होती है, जो वाटर हार्वेस्टिंग से लेकर जल संचयन आदि की तकनीकों को जानते हों।

दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, दिल्ली

www.dce.edu

कोर्स

वाटर हार्वेस्टिंग एंड मैनेजमेंट नाम से यह कोर्स करीब 6 महीने का है। इसके तहत सिखाया जाता है कि बारिश के पानी को किस तरह से मापा जाए, वाटर टेबल का क्या महत्त्व है और उसे किस तरह से रिचार्ज किया जाये।

एलिजिबिलिटी

इसमें एडमिशन की मिनिमम एलिजिबिलिटी 10वीं पास है। अगर आपने इग्नू से बैचलर प्रिपरेटरी प्रोग्राम (बीपीपी) किया हुआ है, तो आप सीधे इस कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।

आईआईटी, मद्रास

www.civil.iitm.ac.in

एक्वाकल्चर

एक्वाकल्चर में समुद्र, नदियों और ताजे पानी के संरक्षण, उनके मौलिक रूप और इकोलॉजी की सुरक्षा के बारे में अध्ययन किया जाता है। इन दिनों घटते जल स्रोतों, कम होते पेयजल संसाधनों के चलते इस फील्ड में विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है।

जवाहरलाल नेहरु टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद

www.jntu.ac.in

कोर्स एंड एलिजिबिलिटी

इस फील्ड में बीएससी और एमएससी इन इक्वा साइंस जैसे कोर्स प्रमुख हैं। इनमें एडमिशन के लिए बायोलॉजी सब्जेक्ट के साथ 10+2 पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा, वाटर कंजर्वेशन और उसकी इकोलॉजी के बारे में गहरा रुझान जरुरी है।

गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, रायपुर

www.gecraipur.ac.in

एनवायर्नमेंट इंजीनियरिंग

एनवायर्नमेंट कंजर्वेशन के फील्ड में बढ़ते प्रयोगों से आज एनवायर्नमेंट इंजीनियर्स की मांग बढ़ी है। अलग-अलग सेक्टर्स के कई इंजीनियर्स आज एन्वायर्नमेंट इंजीनियरिंग में अपना योगदान डे रहे हैं। इनमें एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, बायोलॉजिस्ट, केमिकल इंजीनियरिंग, जियोलोजिस्ट, हाइड्रो-जियोलोजिस्ट, वाटर मेनेजर आदि कारगर भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रीय जल विज्ञान संसथान, रूडकी

www.nih.ernet.in