पृथ्वी के रहस्यों में करियर

टेक्नोलॉजी के विस्तार के साथ अर्थ साइंस के क्षेत्र में जॉब और करियर की नई संभावनाएं उभर रही हैं। यदि आप पृथ्वी के रहस्यों को जानना चाहते हैं और इससे जुड़े क्षेत्र में अपना भविष्य देखते हैं, तो अर्थ साइंस और इससे जुड़े क्षेत्रों में शानदार करियर बना सकते हैं।

आज टेक्नोलॉजी का दायरा बढ़ने के साथ अर्थ साइंस और इससे सम्बंधित फील्ड का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। इसमें कई नए क्षेत्र उभरकर सामने आये हैं। इस फील्ड में काम करने वाले जियोलोजिस्ट (भू-वैज्ञानिक) पृथ्वी से जुडी तमाम अनसुलझी पहेलियों के बारे में डाटा एकत्र करने का काम करते हैं। विज्ञान की इस शाखा के तहत पृथ्वी, इसके पर्यावरण, इतिहास, खनिजों आदि का अध्ययन किया जाता हैं।

जियोलोजी का अध्ययन करने वाले विद्यार्थी जियोलोजिस्ट, हाइड्रोजियोलोजिस्ट, मेटयोरोलोजिस्ट, जियोग्राफर आदि के रूप में काम करते हैं। इस फील्ड से जुड़े प्रोफेशनल्स के लिए पेट्रोलोजी, पैलियोंटोलोजी, जियोफिजिक्स, माइनिंग, एनवायरनमेंटल एजुकेशन, रिसर्च, फील्ड स्टडी आदि में कार्य करने के मौके होते हैं।

स्पेशलाइजेशन

अर्थ साइंस के कई शाखाएं हैं। इनमें एनवायरनमेंटल स्टडी, माइनिंग, जियोटेक्नोलॉजी, डिजास्टर मैनेजमेंट, एटमोसफिरिक साइंस, क्लाइमेट चेंज, ओश्नोग्राफी, रिमोट सेंसिंग, एप्लाइड हाइड्रोजियोलोजी, कार्टोग्राफी, ज्योग्राफिकल इनफार्मेशन सिस्टम, मिनरलोजी, वोल्कानोलोजी, सोइल साइंस, जियोमोर्फोलोजी, जियोलोजिकल इंजीनियरिंग आदि प्रमुख हैं।

जॉब के अवसर

जियोलोजिस्ट का काम जितना चुनौतीपूर्ण है, उतना ही रिवार्डिंग भी है। अर्थ साइंस की फील्ड में सरकारी के साथ-साथ निजी क्षेत्र में जॉब की काफी संभावनाएं हैं। संघ लोक सेवा आयोग जियोलोजिस्ट (जूनियर) ग्रुप ए, असिस्टेंट जियोलोजिस्ट ग्रुप बी इन जियोलोजिस्ट सर्वे ऑफ़ इंडिया पद के लिए परीक्षा आयोजित करता है। जियोलोजिस्ट व जियोग्राफर्स के लिए पेट्रोलियम कंपनी के अलावा खनन कंपनियों, सरकारी व निजी कंपनियों में कार्य करने के खूब अवसर होते हैं।

सैन्य बालों में कार्य करने के खूब अवसर होते हैं। सैन्य बलों व अर्धसैनिक बलों, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, एनवायरनमेंटल कंसल्टिंग कंपनी में भी इनकी जरुरत होती है। द सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड, कोल इंडिया, मिनरल एक्सप्लोरेशन अथॉरिटी, तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम, हिन्दुस्तान जिंक आदि में खनिज पदार्थों की खोज के लिए जियोलोजिस्ट की मांग बनी रहती है। जियोलोजिस्ट प्रष्ठभूमि से जुड़े लोग एनवायरनमेंटल साइंटिस्ट, जियोग्राफर, जियोफिजीसिस्ट, हाइड्रोग्राफर, ओशनोग्राफर या माइनिंग इंजीनियर के रूप में नौकरी पा सकते हैं। पीएचडी करने वालों के लिए रिसर्च एसोसिएट और टीचर के रूप में भी मौके हैं।

कौन कौन से हैं फील्ड

ओशनोग्राफी : इस फील्ड में नमूने एकत्र करना, सर्वे और अत्याधुनिक उपकरणों से डाटा का आकलन करना जैसे कार्य होते हैं। इसमें काम करने वालों को ओशनोग्राफर कहा जाता है। इसमें पानी के घुमाव, बहाव की दिशा और उसकी भौतिक व रासायनिक सामग्री पर नजर रखी जाती है, जिससे पता चलता है कि तटीय इलाकों तथा वहां के मौसम पर क्या असर होगा।

ओशनोग्राफर्स सरकारी व निजी संस्थानों में साइंटिस्ट, इंजीनियर या तकनीशियन के रूप नौकरी पा सकते हैं। इनके लिए जियोलोजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया, मेटयोरोलोजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया और डिपार्टमेंट ऑफ़ ओशनोग्राफी के अलावा मरीन इंडस्ट्री से जुडी रिसर्च सम्बन्धी संस्थानों में भी जॉब्स के बेहतर अवसर होते हैं।

जीआईएस : टेक्नोलॉजी के इस दौर में ज्योग्राफिक इनफार्मेशन सिस्टम (जीआईएस) तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है। इसकी मदद से किसी टारगेट एरिया की मैपिंग की जाती है। खासकर इसका इस्तेमाल अर्थ साइंस, कृषि, परमाणु विज्ञान, आर्किटेक्चर, टाउन प्लानिंग, मैपिंग आदि क्षेत्रों में खूब हो रहा है। इस फील्ड से जुड़े प्रोफेशनल्स के लिए इसरो, नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी, नेशनल इन्फ़ोर्मटिक सेंटर, स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, शहरी विकास प्राधिकरणों, नगरीय निकायों आदि में करियर की बेहतर संभावनाएं होती हैं।

माइनिंग : मीनिंग फील्ड में अर्थ साइंस से जुड़े विद्यार्थियों के लिए काफी मौके होते हैं। इस फील्ड से जुड़े लोगों के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड, कोल इंडिया लिमिटेड, आईपीसीएल नैवेली लिग्नाइट कारपोरेशन, युरेनियम कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया, आईबीपी लिमिटेड में जॉब की बेहतर संभावनाएं हैं। रिसर्च व शिक्षण के क्षेत्र में भी अवसर तलाशे जा सकते हैं।

सॉइल साइंस : सॉइल साइंटिस्ट मिट्टी की एनालिसिस करते हैं। इस क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स सॉइल मैनेजमेंट पर अपनी सलाह देते हैं। वे फील्ड के साथ-साथ लैब में भी काम करते हैं। इस क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स सॉइल केमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, फिजिक्स, मिनेरलोजी, फर्टिलिटी, सॉइल हेल्थ एनालिसिस आदि पर काम करते हैं।

ज्योग्राफी : ज्योग्राफी के एक्सपर्ट रिमोट सेंसिंग एजेंसी, मैप एजेंसी, फ़ूड सिक्यूरिटी, बायोडायवर्सिटी फील्ड में अलग-अलग भूमिका निभा सकते हैं। अगर आप इस फील्ड में अपने करियर को आगे ले जाना चाहते हैं, तो स्पेशलाइजेशन के साथ मास्टर्स डिग्री जरुरी है। ट्रांसपोर्टेशन, पर्यावरण विज्ञान, एयरलाइन, रूट प्लानिंग, सिविल सर्विसेज, कार्टोग्राफी, मौसम विज्ञान, शिक्षा, आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नौकरी मिल सकती है।

कार्टोग्राफी : कार्टोग्राफर बनने के लिए बैचलर ऑफ़ कार्टोग्राफी कोर्स करना होता है। अर्थ साइंस या फिर साइंस ग्रेजुएट भी इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। प्लानर्स, यूटिलिटी कंपनियां, सरकारी एजेंसियों, कंस्ट्रक्शन कंपनियों, सर्वेयर्स, आर्किटेक्ट आदि सभी को कार्टोग्राफर, की जरुरत पड़ती है। मौसम के पूर्वानुमान, ट्रेवल एंड टूरिज्म, मिनरल एक्सप्लोरेशन, सेना, प्रकाशन गृहों में जॉब के अच्छे मौके होते हैं।

सैलरी पैकेज

अर्थ साइंस विज्ञान से जुड़ा क्षेत्र है। इसमें साइंटिस्ट, रिसर्चर और इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के लोग ही काम करते हैं। यही कारण है कि इसमें लोगों को शुरुआत में ही 40 से 50 हजार रूपये की मासिक सैलरी आसानी से मिल जाती हैं, जो समय और अनुभव के पश्चात् लाखों रुपयों तक पहुँच सकती है।