करियर के ‘मित्र’ रोबोट ‘सोफिया’

कुछ सप्ताह पहले हम सभी ने विश्व की ऐसी पहली रोबोट के बारे में अखबारों और न्यूज़ सुर्ख़ियों में पढ़ा और देखा जिसका नाम सोफिया है, जिसे सऊदी अरेबिया में बिलकुल वैसी ही नागरिकता प्रदान की गयी है जैसे कि हम और आप अपने देश में नागरिक हैं।

हैदराबाद में हो रहे ‘ग्लोबल इंटरप्रेन्योर समिट’ के उद्घाटन वाले दिन इवान्का ट्रम्प और देश के प्रधानमंत्री का स्वागत ‘मित्रा’ नामक देश में बने रोबोट ने किया। इससे रोबोटिक्स की बढती महत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

हाल ही में प्रकाशित इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ रोबोटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस समय रोबोटिक्स तेजी से बढ़ता हुआ वैश्विक कारोबार बन गया है। वर्ष 2014 में करीब 2,30,000 रोबोट बेचे गए। यह आंकड़ा इससे पिछले साल के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा था। वर्ष 2014 के अंत तक चीन में रोबोटों की संख्या 1,80,000 थी। जबकि भारत में करीब 12,000 रोबोट थे।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (आईआईटी)

रोबोट ने जहाँ मनुष्य को शारीरिक क्षमताओं के मामलों में पीछे छोड़ दिया है, वहीँ अब दिमागी कामों के मामले में भी रोबोट इंसान को पछाड़ सकते हैं। जापान की सॉफ्ट बैंक कोर्प जैसी दुनिया की कई कंपनियां मानव मस्तिष्क की तरह काम करने वाले रोबोट विकसित कर रही हैं।

ये रोबोट डॉक्टर, इंजिनियर, एडवोकेट, सैनिक, प्रोफेसर, संपादक, इंजिनियर, अकाउंटेंट और सेल्समेन जैसे कई तरह के कार्य कर सकेंगे। यदि हम भारत में रोबोट तैनाती का परिद्रश्य देखें, तो पाते हैं की देश में वहां उद्योग में रोबोटों की संख्या सबसे अधिक है। फोर्ड की सानंद स्थित नई इकाई में 437 रोबोट तैनात हैं। बॉडी शॉप में तो 95 फीसदी काम रोबोट से लिया जाता है। इन आकड़ों को देखते हुए यह कहा जा सकता है की रोबोटिक्स के क्षेत्र में करियर की संभावनाएं काफी उजली हैं।

वीर माता जीजाबाई टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट, मुंबई

क्या है रोबोटिक्स

रोबोटिक्स विज्ञान के अंतर्गत मैकेनिकल और कंप्यूटर इंजिनियरिंग का समन्वित उपयोग होता है। इसके तहत रोबोट की डिजाइनिंग, उनका अनुरक्षण, नए एप्लीकेशन का विकास और अनुसंधान जैसे काम शामिल किये जाते हैं। रोबोटिक्स में मेनिपुलेशन तथा प्रोसेसिंग के लिए कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है। रोबोटिक्स इंजीनियरिंग शाखा में बेसिक इंजीनियरिंग के सिद्धांत और रोबोटिक्स का विकास तथा उपयोग करने के लिए तकनीकी दक्षता सिखाई जाती है। इसमें डिजाईन इंस्ट्रक्शन, ऑपरेशन टेस्टिंग, सिस्टम मेंटेनेंस, रिपेयरिंग आदि शामिल हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ हैदराबाद, हैदराबाद

रोबोटिक्स को सामान्यत: चार वर्गों में बांटा जा सकता है। औद्योगिक, पर्सनल, मेडिकल उपयोग के लिए तथा ऑटोनोमस रोबोट। इनमें सबसे बड़ी श्रेणी औद्योगिक रोबोटो की होती है, जो साधारण प्रोग्राम योग्य रोबोट होते हैं, जिनका इस्तेमाल उत्पादन संयंत्रों में बहुतायत में होता है। उद्योगों में रोबोट्स का उपयोग निर्माण प्रक्रिया को तेज करने के लिए किया जाता है। औद्योगिक रोबोट्स द्वारा वेल्डिंग, पेंटिंग तथा मशीनों में कलपुर्जे लगाने का काम किया जाता है।

रोबोट्स असेंबली, कटाई तथा ऑटोमोबाइल्स के विभिन्न पार्ट्स को लगाने का काम भी बड़ी कुशलता एवं दक्षता से करते हैं।

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस कंप्यूटिंग, मुंबई और पुणे

क्या सीखना होगा

रोबोटिक्स के अन्तर्गत आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस का अध्ययन किया जाता हैं। यह कंप्यूटर विज्ञान की वह शाखा हैं, जिसमें मनुष्य जैसी बुद्धि कैसे आये। कृत्रिम बुद्धि का उद्देश्य ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम बनाना होता है, जो समस्याओं को हल कर सकें। इसमें रिसर्च की दो मुख्य धाराएँ होती हैं। एक है जैविक, जो इस विचार पर आधारित है कि मनुष्य सबसे बुद्धिमान होता है, इसलिए मनुष्य का अध्ययन किया जाये और उसके मनोविज्ञान या शरीर संरचना की रोबोट के रूप में नक़ल उतारी जाए।

दूसरा है, घटना प्रधान, जो संसार के बारे में साधारण ज्ञान की बातों के अध्ययन से संबधित है। रोबोटिक्स विशेषज्ञ ऐसे सिस्टम विकसित करते हैं, जिनसे मशीनों से इंटरैक्ट किया जा सके।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस, बंगलुरु

जरुरी क्वालिफिकेशन

रोबोट तकनीक के अध्ययन के लिए इंजीनियरिंग डिग्री आवश्यक है। इस क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स, मेकेनिक्स तथा कंप्यूटर साइंस जैसे सहयोगी क्षेत्रों का ज्ञान शामिल होता है। इसलिए रोबोटिक्स में करियर बनाने वालों को इन क्षेत्रों से सम्बंधित तकनीकों से भी अवगत होना चाहिए। यदि आप रोबोटिक्स में डिजाइनिंग तथा कण्ट्रोल में विशेषज्ञता प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपको मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करनी होगी।

कोचीन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कोच्ची

कंट्रोल तथा हार्डवेयर में डिजाइनिंग के लिए इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक डिग्री लाभदायक होती है। रोबोटिक्स में करियर बनाने की इच्क्षा रखने वाले विद्यार्थी गणित में बहुत अच्छे होने चाहिए। रोबोटिक्स के क्षेत्र में करियर बनाने हेतु 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स विषय होना निहायत जरुरी है। इसके साथ ही उच्चतम प्रतियोगी तथा तकनीकी क्षेत्र में अविष्कार तथा कुछ नया करने के लिए सृजनात्मक योग्यता भी बेहद जरुरी है।

रोबोटिक्स के क्षेत्र में करियर बनाने वालों को सबसे पहले यह करना होगा कि वे कंप्यूटर, आईटी, मेकेनिकल, मेकेट्रोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई या बीटेक की डिग्री प्राप्त करें। यदि आप उच्च अध्ययन करते हैं, तो इस क्षेत्र में आपके प्रवेश की सम्भावना और अवसर दोनों ही बढ़ जायेंगे।

सेण्टर फॉर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स, बेंगलुरु

जॉब की संभावनाएं

रोबोटिक्स में काम करने वाले विद्यार्थी इसरो जैसे अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन में रोजगार के विशिष्ट अवसर प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही माइक्रोचिप बनाने वाले उद्योगों में भी रोबोटिक्स इंजीनियरों की खासी मांग है।

रोबोटिक्स इंजीनियरिंग में स्पेशलाइजेशन से मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, खनन, परमाणु ऊर्जा सयंत्र जैसे क्षेत्रों में करियर निर्माण के दरवाजे खुल जाते हैं। बहुराष्ट्रीय कोम्पनियों द्वारा योग्य रोबोटिक्स प्रोफेशनल्स के अलावा रोबोटिक्स कारोबार में दक्ष मैनेजमेंट, सेल्स, और एकाउंट्स, क्षेत्र के प्रोफेशनल्स को बड़ा वेतन एवं अन्य सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं।

बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स), पिलानी

वेब डिजाइनिंग में बनायें अपना बेहतरीन करियर

तकनीकी विकास के साथ साथ कंप्यूटर ने क्रान्ति ला दी है यानि कंप्यूटर लोगों के लिए संचार का ऐसा जरिया बना है, जिसमें इन्टरनेट के जरिये वेबसाइट से कुछ भी सर्च कर सकते हैं। बस एक क्लिक करें और ज्ञान का पिटारा आपके सामने हाजिर है।

लेकिन इसके पीछे काफी रोचक और रचनात्मक करियर विकल्प भी छुपे हुए हैं। इसके आकर्षक लुक और कंटेंट डिजाईन करने में एक वेबसाइट डिज़ाइनर का अहम् रोल होता है।

वेबसाइट डेवलपर

वेबसाइट डेवलपर एक वेब प्रोग्रामर होता है, जो ख़ास प्रोग्राम बनाता है। वेबसाइट का डाटा बेस बनाना और उसकी प्रोग्रामिंग करना उसकी जिम्मेदारी होती है। वेबसाइट डेवलपर को विभिन्न प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जैसे एएसपी, पीएचपी की जानकारी होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त एचटीएमएल स्क्रिप्ट पर काम करना आना चाहिए। कुछ स्क्रिप्टिंग लैंग्वेज भी होती हैं, जैसे पर्ल, स्क्रिप्ट और पीएचपी, इनकी जानकारी भी जरुरी है।

कोर्स

डिप्लोमा इन ग्राफ़िक एंड डिजाईन, डिप्लोमा इन सर्टिफिकेट कोर्स इन वेब डिजाईन एंड वेब प्रोडक्शन, बीए इन मल्टीमीडिया, बीए वीएफएक्स एंड एनीमेशन, सर्टिफिकेट इन वेबसाइट  डिजाईन एंड मैनेजमेंट, एडवांस्ड सर्टिफिकेट इन वेब डिजाईन एंड इंटरेक्टिव मल्टीमीडिया, ग्राफ़िक एंड वेब डिजाईन शार्ट टर्म कोर्सेज, डिप्लोमा इन एडवांस्ड लेवल वेब डिजाइनिंग एंड वेब प्रोडक्शन जैसे कोर्स होते हैं।

क्या सिखाया जाता है

कोर्स के दौरान टेम्पलेट डिजाइनिंग, वेबसाइट डिजाइनिंग, लोगो डिजाइनिंग, एनीमेशन, पोर्टफोलियो डिजाइनिंग, फ़्लैश, बैनर डिजाइनिंग, ग्राफ़िक डिजाइनिंग, वेबसाइट मेंटेनेंस, मूवी मेकिंग, अडोब फोटोशोप, अडोब इलस्ट्रेटर, कोरल ड्रा, एचटीएमएल, जावा स्क्रिप्ट, ई-कॉमर्स वेबसाइट, जुमला, वर्ड प्रेस, ब्लॉग्गिंग और सोशल मीडिया का प्रशिक्षण दिया जाता है।

पर्सनल क्वालिफिकेशन

एक वेब डिज़ाइनर के लिए क्रिएटिव होना जरुरी है। डिजाईन क्रिएट करने में वेब डिज़ाइनर मुख्य रूप से अपना ध्यान ग्राफ़िक डिजाइनिंग और लेआउट पर केन्द्रित रखता है। वेब डिज़ाइनर को कलर थ्योरी और कला की बारीकी को सीखना जरुरी होता है। इसके लिए उसे किसी अच्छे संस्थान से डिजाईन, प्रोग्रामिंग एवं इन्टनेट मार्केटिंग में डिग्री या डिप्लोमा लेना चाहिए।

सम्भावनाएं

एक वेब डिज़ाइनर के लिए कई क्षेत्रों में बेहतर करियर मौजूद हैं, जिनमें  प्रिंट मीडिया (समाचार पत्र, पत्रिकाएं, विज्ञापन, प्रकाशन हाउस), ऑनलाइन कैंपेन और सोशल मीडिया में बेशुमार संभावनाएं हैं।

मल्टीनेशनल कंपनियों व् मार्केटिंग फर्म में एक वेब डिज़ाइनर के लिए बेशुमार अवसर हैं। इसके अलावा ऑडियो विजुअल मीडिया, डिजाईन स्टूडियो आदि प्रमुख हैं। अच्छे वेब डिज़ाइनर को इस क्षेत्र में कई तरह की नौकरियां मिल सकती हैं, जिसमें साईट डेवलपर, प्रोडक्शन को-ऑर्डिनेटर, वेब प्रोडक्शन मेनेजर, वेब मीडिया डिज़ाइनर एवं इंटरैक्टिव प्रोडक्शन आर्टिस्ट आदि प्रमुख हैं। एक वेब डिज़ाइनर को शुरूआती सैलरी 20 से 25 हजार रूपये तक मिल जाती है।

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन

क्रिएटिव होना पहली शर्त है, लेकिन शैक्षणिक योग्यता के बिना करियर की राह अधूरी है। बैचलर डिग्री में दाखिले के लिए किसी भी विषय से 50 प्रतिशत अंको के साथ 12वीं पास होना जरुरी है। इसमें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी कर सकते हैं। इसमें आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस किसी भी विषय के विद्यार्थी प्रवेश ले सकते हैं।

नेचर ऑफ़ वर्क

वेबसाइट को आकर्षक रूप कुशल डिज़ाइनर ही देता है। इसका मुख्य पेज ही पाठकों को आकर्षित करता है। डिजाइनिंग के काम के लिए वे लोग उपयुक्त हैं, जिन्हें नए ट्रेंड के अनुसार वेबसाइट को डिजाईन करना और उसमें कंटेंट को प्रस्तुत करना आता हो। वेब डिजाइनिंग के अंतर्गत कंटेंट राइटिंग, प्रोडक्ट फोटोग्राफी और ग्राफ़िक डिजाइनिंग ख़ास होती है।

फायदे का सौदा

वेबसाइट डिज़ाइनर की पहली पहचान क्रिएटिविटी और टेक्निकल स्किल्स हैं और वेबसाइट की पहली पहचान उसका आर्कषक होना है। वेबसाइट का लोगों पहली नजर में ही किसी भी कंपनी या ब्रांड की ऐसे छवि तैयार करे, जो ग्राहकों को उसके पास आने को प्रेरित कर दे।

आज हर कंपनी अपने कार्य के संचालन, प्रोडक्ट और अपने बैकग्राउंड का ब्यौरा यानी अपनी पूरी पहचान वेबसाइट के लिए जरिये बताती है। इंस्टिट्यूट हों, मल्टीनेशनल कंपनियां, एंटरटेनमेंट सेक्टर या फिर मीडिया जगत, हर जगह एक नए तरह के रोजगार की शुरुआत हुई है। आप फ्रीलान्स डिज़ाइनर के तौर पर भी काम कर सकते हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र में विभिन्न कंपनियां अपने डिज़ाइनर को बेहतर पैकेज ऑफर करती है।